यार, कभी सोचा है? आजादी की लड़ाई सिर्फ गांधी, नेहरू या भगत सिंह की नहीं थी। इसमें छोटे-छोटे बच्चे और किशोर भी शामिल थे। इतनी कम उम्र में इतना बड़ा साहस... सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आज बात करते हैं भारत के 5 सबसे कम उम्र के स्वतंत्रता सेनानियों की, जिन्होंने उम्र के हिसाब से तो बच्चे थे, लेकिन जज्बे में बड़े-बड़े योद्धाओं को पीछे छोड़ दिया।
1. बाजी राउत (सिर्फ 12 साल)
ओडिशा के एक छोटे से गांव का 12 साल का लड़का बाजी राउत। रात के अंधेरे में ब्राह्मणी नदी के किनारे खड़ा था। अंग्रेज पुलिस वाले आए और बोले – “नाव निकाल, हमें पार करा।” बाजी ने साफ मना कर दिया। “नहीं दूंगा!” पुलिस ने गोली चला दी। 12 साल का बच्चा वहीं शहीद हो गया। सोचो, इतनी छोटी उम्र में अंग्रेजों के सामने सीना तानकर खड़ा होना... ये साहस किसी फिल्म में भी मुश्किल से दिखता है।
2. कनकलता बरुआ (17 साल)
असम की बेटी कनकलता। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन चल रहा था। गोहपुर थाने पर तिरंगा फहराने निकली जुलूस की अगुवाई कर रही थी। पुलिस ने रोका, धमकी दी। लेकिन कनकलता ने झंडा नहीं छोड़ा। गोली लगी, गिर गईं... लेकिन तिरंगा हाथ से नहीं छूटा। 17 साल की उम्र में शहीद हो गईं। लोग आज भी उन्हें “बीरबाला” कहते हैं।
3. खुदीराम बोस (18 साल)
बंगाल का खुदीराम। महज 18 साल का। मुजफ्फरपुर में बम फेंका अंग्रेज अफसर पर। पकड़ा गया। कोर्ट में भी मुस्कुराता रहा। फांसी के तख्ते पर चढ़ते वक्त भी चेहरे पर मुस्कान थी। लोग कहते हैं – फांसी से पहले भी वो “वंदे मातरम” बोल रहा था। इतनी कम उम्र में इतनी हिम्मत... आज सोचकर भी अचरज होता है।
4. हेमू कालाणी (19 साल)
सिंध का हेमू। 19 साल का युवक। अंग्रेजों की सैन्य ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिश की। पकड़ा गया। पूछताछ में साथियों के नाम नहीं बताए। फांसी की सजा सुनाई गई। फांसी पर चढ़ते वक्त भी “भारत माता की जय” और “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे लगा रहा था। इतना जज्बा... कमाल है यार!
5. करतार सिंह सराभा (19 साल)
पंजाब का करतार सिंह सराभा। गदर पार्टी का सबसे युवा और सक्रिय सदस्य। अमेरिका से पढ़ाई छोड़कर भारत लौटा और क्रांति में कूद पड़ा। 19 साल की उम्र में लाहौर जेल में फांसी दे दी गई। भगत सिंह खुद उन्हें अपना गुरु और आदर्श मानते थे। मतलब जो भगत सिंह को प्रेरित करे, वो कितना बड़ा होगा!
भाई, इन पांचों की कहानियां पढ़कर एक बात साफ समझ में आती है – देशभक्ति की कोई उम्र नहीं होती। 12 साल का बच्चा भी अंग्रेजों को चुनौती दे सकता है, तो हम युवा आज क्यों पीछे हटें?
इन अमर शहीदों को दिल से नमन। अगर ये कहानियां अच्छी लगीं तो दोस्तों के साथ जरूर शेयर करना। जय हिंद!
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